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Saturday, 25 February 2017

सूझ-बूझ


एक बार की बात है, एक किसान अपने खेत से काम कर के घर को लौट रहा था । काफी थका होने कारण उसे भूख भी लग रही थी पर उसकी जेब में थोड़े सिक्के ही थे । रास्ते में  हलवाई की  दुकान पड़ती थी । किसान मिठाई की दूकान पर रुका और उनकी सुगंध का आनंद लेने लग गया । हलवाई ने उसे ऐसा करते देखा तो उसे कुटिलता सूझी । जैसे ही किसान लौटने लगा, हलवाई ने उसे रोक लिया । किसान हैरान होकर देखने लगा । हलवाई बोला - "पैसे निकालो" । किसान बोला - "किस बात के पैसे ? मैंने  तो मिठाई खाई ही नहीं।" हलवाई बोला, तुमने मिठाई खाई भले ही न हो लेकिन  इतनी देर से खड़े होकर उसकी खुशबु का आनंद तो लिया है ना । मिठाई की खुशबू लेना मिठाई खाने के बराबर है । तो तुम्हे उस खुशबू का आनंद उठाने के ही पैसे भरने होंगे नहीं तो में तुम्हे जाने नहीं दूंगा । किसान पहले तो बहुत घबरा गया लेकिन थोड़ी सूझ-बूझ बरतते हुए उसने अपनी जेब से सिक्के निकले । उन सिक्कों को अपने दोनों हाथों के बीच डालकर जोर से खनकाया । जब हलवाई ने उन सिक्को की खनक सुन ली तब किसान सिक्कों को जेब में रख कर वहां से जाने लगा । हलवाई ने फिर से उसे रोक कर पैसे मांगे तो किसान बोला - जिस तरह मिठाई की खुशबू लेना मिठाई खाने के बराबर है, उसी तरह सिक्कों की खनक सुनना पैसे लेने के बराबर है ।

जीवन मंत्र - जीवन की हर मुश्किल संयम और सूझ बुझ से हल की जा सकती है | 

Sunday, 29 January 2017

पुरुषार्थ से स्वर्ग प्राप्ति


एक बार की बात है एक साधु नदी के किनारे बैठ कर माला जप रहा था । ऐसा करते देख साधु को एक दूसरा व्यक्ति काफी देर से देख रहा था । काफी समय होने के बाद जब उस से रहा ना गया तो वह साधु के पास पंहुचा और उनसे बोला, 'आप इतनी देर से क्या करे रहे है ?' साधु बोला, 'देखते नहीं ? में कठिन जप कर रहा हूं ।' उस व्यक्ति ने साधु से पूछा 'आपके इस जप से क्या होगा ?' साधु थोड़ा मुस्कुराते हुए बोले, ' इससे स्वर्ग की प्राप्ति होगी, यही कारण है की में इतनी देर से यहाँ कठिन जप कर रहा हूँ |' यह सुन वह व्यक्ति वही साधु के पास बैठ गया और पास में जमीन पर पड़ी बालू उठा-उठा कर नदी में फेकने लगा । जब साधु ने उसे ऐसा करते देखा तो पूछा, 'तुम यह क्या कर रहे हो ?' वह व्यक्ति बोला, 'में नदी पुल बना रहा हूँ |' साधु बोला - 'वत्स, पुल इस तरह नहीं बना करते । उसके लिए इंजीनियर, श्रमिक, सामान और जरुरी धन जुटाना पड़ता है । उनके समन्वित प्रयासों से पुल तैयार होते है । महज बालू डालने से पुल नहीं बनने वाला ।' साधु की यह बात सुन कर वह व्यक्ति तुरंत पलट कर बोला, 'हे साधु यही तो में कहना चाहता हूँ की सिर्फ मंत्र बोलने या माला जपने से स्वर्ग नहीं मिल सकता । इसके लिए संयम, ज्ञान, पुरुषार्थ जैसे पुण्य भी तो करने होंगे ।' एक आम आदमी से ऐसी महत्वपुर्ण बात सुनकर साधु की आँखे खुल गई । उसने अपनी भूल स्वीकार की और फिर कर्मयोगी बन गया ।

जीवन मंत्र - अपने कर्मो को पूरी ज़िम्मेदारी से करना ही सच्चा जप है |